‘‘विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे ।’’(इफिसियों 3:17)
मन मन्दिर में आ मसीहा, मन मन्दिर में आ;(2)मुझे तू शुद्ध बना ।।(2)
1.जीवन भरा पाप से मेरा, सूझता जिस से नहीं किनारा;(2)कौन दिखाए मार्ग अब मेरा, तू ही मुझे अब बचा ।(2)
2.जग अन्धेरा और अशुद्ध सारा, जहाँ जाऊँ प्रभु पाप अन्धेरा;न कोई मिला बचावनहारा, तू ही मुझे अब बचा ।
3.द्वार अब तेरे मैं यीशु आया, सारा संसार प्रभु मैं खोज लिया;तू ही है मेरा प्राण-अधारा, मुझे तू अपना बना ।
4.प्रेम के कारण लोहू बहाया, त्राण देकर तू ने पिता से मिलाया;स्वर्गीय भवन में मुझे तू लाया, जीवन सनातन दिया ।