‘‘संध्या, प्रातः और दोपहर मैं प्रार्थना करूँगा... ।’’ (भजन 55:17)
1.पवित्र समय प्रार्थना का,... सांसारिक बातें छोडूँगा;और स्वर्गीय पिता के सन्मुख,... हृदय अपना उण्डेलूँगा;कठिन विपत्ति के समय,... वही तो एक सहायक है;शैतान के जाल से बचता हूँ,... जब प्रार्थना करके जागता हूँ ।
2.पवित्र समय प्रार्थना का,... जब जान के उसकी सत्यता;पिता से बिनती करता हूँ,... आशीष की आशा करता हूँ;मुझे प्रभु बुलाता है,... समझाने, क्या अनुग्रह है;चिंताए सारी प्रार्थना कर,... डाल देता हूँ मैं उसी पर ।
3.पवित्र समय प्रार्थना का,... भरोसा उस पर सदा का;है मेरा, जब तक कर विश्वास,... मैं न जा पाऊँ तेरे पास;इस देह को छोड़ मैं जाऊँगा,... कि स्वर्ग में मुकुट पाऊँगा;फिर देख सामने ईश्वर को,... पाऊँगा प्रार्थना के फल को ।