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SIYON KE GEET · SONG 452

दिव्य प्रेम, सर्वोत्तम सब से

divy prem, sarvottam sab se

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‘‘मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है ।’’(इफिसियों 3:19)
1.दिव्य प्रेम, सर्वोत्तम सब से,... स्वर्गीय आनन्द आ उतर;हम को अपना मन्दिर कर ले,... इस में अपनी महिमा भर;यीशु तू दया का सागर,... प्रेम असीम और शुद्ध तू है;आकर हम को भी मुक्ति दे,... थाम ये हाथ जो कांपते हैं।
2.आत्मा हम पर उण्डेल दे,... सब घबराए दिलों में;शान्ति तेरी जो अमिट है,... तुझ से हम को भी मिले;पाप से काले मन को शुद्ध कर,... आदि और अन्त तू हो;आदि, अन्त विश्वास का तू ही,... हम को मुक्त कर दे अभी ।
3.आ, हे सामर्थी उद्धारक !... तेरा अनुग्रह पाएं;शीध्र आ और फिर कभी भी,... छोड़ न, पास तू रह सदा;तुझ को ही सदा सराहें,... सेवा तेरी ही करें;प्रार्थना, भक्ति करते हुए,... तेरे सिद्ध प्रेम में बढ़ें ।
4.अन्त तक यह जीवन हमारा,... शुद्ध निर्दोष बना रहें;तुझ से हम सब त्राण को पाके,... तेरे ही बने रहें;तेज पर तेज पा, रूप बदलते,... जब तक स्वर्ग में न मिलें;तब तेरे चरणों में झुक कर,... स्तुति-प्रार्थना करें ।

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