‘‘जीवन की रोटी मैं हूँ ।’’ (यूहन्ना 6:48)
1.जीवन की रोटी अब प्रभु खिला,... जैसे समुद्र पास खिलाता था;बाइबल में खोजूँगा दर्शन तेरे,... मैं तेरा भूखा हूँ, तू तृप्त कर दे ।
2.जीवन की रोटी तू है सर्वदा,... वचन के द्वारा तू मुझे बचा;तब हर एक बन्धन से छूट जाऊँगा,... मैं पूरी शान्ति तुझ से पाऊँगा ।
3.सामर्थी आत्मा दे, प्रभु मुझे,... तू मेरी आँखे छू के दृष्टि दे;जो बातें छिपी हैं उन्हें दिखा,... तब जीवनदाता तुझे देखूँगा ।
4.सत्य रोटी, प्रभु ! मुझे खिला,... जैसे गलील में तू खिलाता था;बन्धन को मेरे खोल, छुटकारा दे,... तब पाऊँगा विश्राम पूर्ण आनन्द से ।