CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 477

कितना सुन्दर नगर वह है

kitana sundar nagar vah hai

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‘‘... पवित्र नगर... ।’’(मत्ती 27:53)
कितना सुन्दर नगर वह है,अद्भुत है, ज्योतिर्मय, प्रताप से भरा है;पवित्र, पवित्र, पवित्र सब कुछ है ।।
1.पवित्र जन वहाँ साथ उस के रहेंगे,प्रभु ने जिन को लहु से खरीदा है;नगर में जायेंगे, जयवन्त जो बने हैं;जयवन्त है, जयवन्त है, बढ़कर जयवन्त है ।
2.यह बातें मनुष्य के समझ के परे हैं,प्रभु के आत्मिक जन सब जान जाते हैं;यह आत्मिक बाते हैं, आत्मा समझाता है,आत्मिक है, आत्मिक है, सब बातें आत्मिक हैं ।
3.आत्मिक जन जानते हैं वह नगर कैसा है,स्वाद उस का धरती पर प्रभु ने चखाया है;आनन्द से स्थिर रहकर ऊपर को देखते हैं,आनन्द है, आनन्द है, स्वर्गीय आनन्द है ।

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