‘‘और वे मेरे लिए एक पवित्रस्थान बनाएँ... ।’’(निर्गमन 25:8)
मन्दिर बनाओ मेरे लिए, प्रभु परमेश्वर तू ने कहा है;हे इस्राएल, निवास-स्थान एक; बनाओ तुम मेरे लिए ।।
1.बबुल की लकड़ी का सन्दुक बनाओ, शुद्ध सोना उस पर मढ़ लो;बबूल तुम हो, तू ने कहा है ।
2.प्रायश्चित का ढ़कना बनाओ, प्रायश्चित मैं ही हूँ, देखो;प्रायश्चित में प्राण दिया है ।
3.वेदी बनाओ फिर तू कहा है, वेदी मेरा क्रूस बना है;लोहू बहाके बलिदान किया है ।
4.द्वार बनाया आँगन में है, कार्य अपना पूरा किया है;आदर महिमा प्रभु तेरा है ।
5.मेरा जो कुछ, प्रभु, तेरा है, तेरा ही सब मुझ को दिया है;प्रेम, अनुग्रह प्रभु मुझ पर किया है ।
6.प्रभु अपने पवित्र नगर में, रहने को स्थान मुझ को दिया है;युग-युग रहूँगा साथ तेरे मैं ।