‘‘हाँ मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ ।’’(यिर्मेयाह 31:3)
1.यीशु के प्यार के दरिया को,... हैरत से मैं ने देखा;और अपने इस बेचैन दिल में,... पूरा इतमिनान पाया ।यीशु मसीह के पाक खून से,... गुनाह मेरे हुए सब दूर;उसने मुझे मुफ्त नजात दी,... और खुशी से किया भरपूर ।
2.इस से पहिले मैं जहान में,... मुसीबत में मारा फिरा;लेकिन जब यीशु पास आया,... आराम उसने मुझे दिया ।
3.सिर पर मेरे हाथ को रखकर,... कहा कि जा, चंगा हो जा;शिफा मैं ने उसी दम पा ली,... जब उस की पोशाक को छुआ ।
4.यीशु मसीह प्यारा मुंजी,... दहिने हाथ पर छायामान;उसके मुख का प्रकाश मुझ पर,... चमकता रहता है आन ।