‘‘यहोवा मेरा चरवाहा है ।’’ (भजन 23:1)
1.यीशु चरवाहा मेरा है,... मैं उसकी दया पाता;न कोई आवश्यकता है,... जब वह प्रभु है मेरा ।
2.मुझको वह अमृत जल के पास,... कुशल से ले चलता;और होती जहाँ हरित घास,... वह स्वर्गीय भोज खिलाता ।
3.हठीली भेड़, मैं फिरता था,... वह प्रेम से खोजने आया;जब पाया काँधे पर रखा,... आनन्द से धर ले आया ।
4.छाया में मौत की गर वह साथ,... न हो मुझे कोई भय;कि साहस देते उस के हाथ,... जब पथदर्शक प्रभु है ।
5.तू मेरे लिए मेज लगा,... भोजन स्वर्गीय खिलाता;कटोरे में है आशीष के,... तू मेरी प्यास बुझाता ।
6.हे प्रभु मैं इस जीवन भर,... तेरी ही दया चाहता;सच्चे चरवाहे तुझ ही पर,... मन मेरा लगा रहता ।