(भजन 22:1-10)
मेरे खुदा ! मेरे खुदा ! ... तू ने मुझे छोड़ दिया ?(2)मेरी मदद से दूर क्यों... रहता है तू मेरे खुदा ?(2)
1.दिन को पुकारता हूँ मैं... जवाब मुझे नहीं दिया;(2)रातों को चूप रहूँ न मैं... क्यों फिर जवाब नहीं दिया ?(2)
2.प्रशंसा के सिंहासन पर... बैठा तू इस्राएल के है;तू ही केवल पवित्र है... पूरखों ने तेरी आस की ।
3.सब जो भरोसा रखते थे... उद्धार वे तुझ से पाते थे;जब दुहाई उन्होंने दी... तू ने उन्हें बचाया भी ।
4.तुझ पर भरोसा रखते थे... लज्जित कभी न होते थे;परन्तु प्रभु मैं कीडा हूँ... मैं तो मनुष्य नहीं हूँ ।
5.नाम धराई मनुष्यों में... अपमान मेरा लोगों में है;वे सब जो देखते मुझे... ठट्ठा मेरा भी वे करते हैं ।
6.मुँह मेरा भी चिढ़ाते हैं... और सिर हिला के कहते है;‘‘भरोसा कर यहोवा का... वही तुझे छुड़ाएगा ।’’
7.पेट से बाहर लाया मुझे... आस रखना सिखलाया मुझे;गर्भ से तू मेरा ईश्वर है... जन्म से पालनहार तू है ।