‘‘उठ, प्रकाशमान हो ।’’(यशायाह 60:1)
उठ, ज्योतिमान तू हो जा,... तेरी ज्योति है तुझ पर चमकी;(2)यहोवा का तेजोदय हुआ,... प्रकाशमान तू हो जा ।।(2)
1.और अन्य जातियाँ तेरे,... प्रकाश की और चलेगी;(2)और राजा सारे तेरी,... चमक की और चलेंगे ।(2)
2.समुन्दर का सारा धन,... अन्य जातियों का धन सम्पत;तुझको यह सब मिलेगा,... हृदय आनन्द से भरेगा ।
3.देवदार, तिधार, सनौवर,... मिलकर मेरे घर में आएँगे;और में अपने चरणों के,... उस स्थान को महिमा दूँगा ।
4.मैं तुझे सदा की उत्तमता,... का कारण ठहराऊँगा;और पीढ़ी-पीढ़ी के हर्ष का,... कारण तुझे ठहराऊँगा ।
5.छोटा हजार बनेगा,... थोड़ा सामर्थी जाति बनेगा;इस कार्य को मैं यहोवा,... समय पर पूरा करूँगा ।