(भजन 40:1-4)
मैं धीरज से आशा रखके... यहोवा की करता था इन्तिजारी;तब उसने मेरी ओर झुक के... सुनी मेरी हाँ सारी दूहाई ।।
1.उसने मुझे विनाश के गढ़े और... दलदल की किचड़ में से निकाला;चट्टान पर खड़ा करके मुझे... स्थिर किया है पैरों को मेरे ।
2.प्रभु ने गीत एक नया सिखाया... की जिसके लिये स्तुति हो उसकी;बहुतेरे यह देखकर डरेंगे... और उस पर भरोसा सब रखेंगे ।
3.वह आदमी है बड़ा ही धन्य... भरोसा जिसका है यहोवा पर;धमण्डियों की सलाह न लेता... न झूठे लोगों की ओर मुड़ता ।