CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 55

झिडके क्यों तू कोप में

jhidake kyon too kop mein

More
(भजन 38:1-9)
झिडके क्यों तू कोप में,... मुझ को ऐ खुदा;और क्रोध में अपने क्यों,... देवे मुझे सजा ?(2)
1.मुझे तेरे तीर भी अब जोर से लगे है,(2)हाथ तेरे जो भारी अब मेरे ऊपर है ।(2)
2.कोप तेरे से है यह मेरा तन बीमार,हड्डियाँ बेआराम है, हूँ बड़ा गुनाहगार ।
3.सिर से पार भी हो गए मेरे सब गुनाह,कैसे मैं उठा सकूं यह भारी है गुनाह ।
4.दुर्गन्ध है बन गए ये धाँव मेरे सब ही,सड़ गए हैं ये सब ही मूढ़ता है मेरी ।
5.कुबड़ा होकर झुक गया मैं, रोता सुबह शाम;जलन है कमर में, शरीर बेआराम ।
6.मैं लाचार हो गया, बैठा जाता हूँ;दिल मेरा बेचैन है, कराहता रहता हूँ ।
7.दिल की प्रभु चाहना, सब तेरे सन्मुख है;वेदनाएँ सब मेरी, न तुझ से छीपी हों ।

Back to Siyon Ke Geet