‘‘जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा,...फिर उन को पहचाना कि ये यीशु के साथ रहे है ।’’(प्रेरितों 4:13)
यीशु प्रभु साथ अब है, हिम्मत से हम बढ़ेंगे;मार्ग कैसा भी कठिन हो, पीछे नहीं हटेंगे ।।
1.जो चीजें पुरानी थी वो सब कब से बीत गई,यीशु में नया बनकर नयी बातें कहेंगे;आज्ञा प्रभु की हमें अद्भुत रीति से मिली,स्वर्गीय दर्शन जो पाया हम उस को न टालेंगे ।
2.शैतान, संसार, शरीर से सदा हम तो लड़ेंगे,जो कुछ कीमत देनी हो आनन्द से हम देवेंगे;युद्ध में जयवन्त होवेंगे शक्ति प्रभु से लेंगे,विजय के अनुभव में राज्य शैतान का तोड़ेंगे ।
3.चाहे दुःख और रोग भी आए चिन्ता हम न करेंगे,यीशु नासरी के नाम से तन्दुरुस्ती पायेंगे;थोड़े दिन की यात्रा में हम न कुडकुड़ायेंगे,जैसा भी प्रभु रखें सदा सन्तुष्ट रहेंगे ।
4.प्रभु यीशु का जो मन वही हम भी रखेंगे,ईर्ष्या, क्रोध, विरोध को छोड़ प्रेम से सब को देखेंगे;हल पर हाथ रखकर हम पीछे नहीं मुडेंगे,यीशु प्रभु है निशान उसी की ओर चलेंगे ।
5.ये पुराना मनुष्य को क्रूस के द्वारा मारेंगे,भीतरी मनुष्यत्व में हम रोज-ब-रोज बल पायेंगे,आत्मिक ऊँचाई में हम ऊपर की ओर बढेंगे,शारीरिकता को हम सब मिलकर पाँव से कुचलेंगे ।
6.इस संसार को छोड़ेगें यात्रा पूरी करेंगे,ऊपर जो हमारा घर पवित्र नगर में पहुँचेंगे ;प्रभु से हम मिलेेंगे आनन्द से भर जाएँगे,इनाम उस से पायेंगे सदा साथ रहेंगे ।