CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 565

पवित्र तुम बनें रहना

pavitr tum banen rahana

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‘‘पवित्र बनों, क्योंकि मैं पवित्र हूँ ।’’ (1 पतरस 1:16)
पवित्र तुम बनें रहना, खराई से सदा चलना;पवित्रता में तुम बढ़ना ।।
1.चाल चलन में, पहिरावे में, ठोकर का कारण नहीं बनना;प्रश्न चाहे हजार कोई पूछे, हर बात में तुम सदा, पवित्र रहना ।
2.हर जगह में, हरेक काम में, पवित्रता को आदर्श समझना;हर तरह और हर समय में, हर काम में तुम सदा, पवित्र रहना ।
3.मेल-मिलाप तुम, सब से रखना, एकता और प्रेम को बढ़ाना;कड़वी जड़ कोई कष्ट अगर देवें, प्रेम से दूर कर के तुम, पवित्र रहना ।
4.स्वर्गीय जीवन है पवित्र, पवित्रता जीवन में दिखाना;भेषधारी जीवन व्यर्थ है, भेष को दूर रख के तुम सदा, पवित्र रहना ।
5.शुद्ध गवाही सुरक्षित रखती, सिद्ध करती जग में, यह जानना;शुद्ध विवेक से शुद्ध गवाही, दे कर के तुम सदा, पवित्र रहना ।
6.नीति-ज्योति साथ हो तो, क्षति कभी न होगी, परखना;धर्मी लोग यह देते गवाही, सच है यही इसलिए, पवित्र रहना ।
7.आत्मा प्राण और देह को, अपने निर्दाष और सुरक्षित रखना;पाप-दाग या दोष यदि दिखता, क्रूस के लहु से धुल जाना, पवित्र रहना ।

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