‘‘हम सच्चे मन से परमेश्वर के समीप जाए ।’’(इब्रानियों 10:22)
1.प्रभु तेरा हूँ तेरे वचन से,... तेरा प्रेम पहचानता हूँ;मेरी कामना है कि विश्वास से मै जा के तेरे पास रहूँ ।रख तू मुऽऽऽझ को, मुऽऽऽऽझ को, मुझ को हे मसीह;अपने क्रूस के सोते पास,रख तू मुऽऽऽझ को, मुऽऽऽऽझ को, मुझ को हे मसीह;अपने घायल पांजर पास ।।
2.आत्मा भेज, कर शुद्ध, सेवा योग्य बना, मुझ को सेवा में लगा;मेरा मन कर स्थिर, मेरी इच्छा को अपनी इच्छा में मिला ।
3.अपनी प्रार्थना में जैसे मित्र से, वैसे तुझ से बात करुँ;एक घड़ी भी जो तेरा साथ मिले, तो महा-आनन्दित हूँ ।
4.सब से गहरा प्रेम मैं न जानूँगा, जब तक स्वर्ग न पहुँचुंगा;सब से श्रेष्ठ आनन्द तब मिलेगा, जब तुझ को साक्षात देखूँगा ।