‘‘अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है और नीचेसनातन भुजाएँ है ।’’ (व्यवस्था 33:27)
अनादि ईश्वर आश्रय है,भुजाएँ उसकी तेरा आधार है;अनन्त और सच्चा परमेश्वर,सदा तक वह हमारा ईश्वर;मृत्यु तक वह अगुवाई करेगा ।।
1.करुणा से वह मुझ को खींचा, पवित्र स्वर्गीय प्रेम;इस जंगल में मोहित करके, तुम्हें बिनती कर बुलाया । अनन्त...
2.अन्धकार के मार्ग में वह शुद्ध स्वर्गीय ज्योति,दुःख से भरपूर तराईयों को सोतों में वह बदल दिया ।3.कृपा से तेरा हृदय जो पिघला पवित्र स्वर्गीय प्रेम,तेरी शान्ति की वाचा जो बंधी, प्रभु निश्चय रक्षा करेगा ।
4.इस संसार में यात्रा बिताएगा प्रभु की दया से,घने जंगल में भी प्रभु की गोद में तुम्हें शान्ति मिलेगी ।
5.सूखा जीवन अंकुर जो आया शुद्ध प्रभु की कृपा से,सिर पर सदा का आनन्द होगा दुःख शोक सब जाता रहेगा ।
6.जय जयकार तुम करते हुए प्रभु के पास लौट आओ,सिय्योन पर्वत के पास आकर शान्ति, आनन्द पाओ ।