"हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है |"( फिलिप्पियों Philippians 3:20)
प्रकाशमय जो अद्भुत देश हव,प्रिय देश है वह, और मनोहर है वह ||
1.पाप रहित देश वह है और श्राप वहाँ, देख न पड़े,सदा का आनन्द सदा का गीत वहाँ आकाश में होशाना, हल्लेलूयाह |
2.सूरज-चाँद है नही, फिर भी अन्धकार है नहीं,ईश्वर का पुत्र, ज्योति वही है, हर दिन ज्योति देगा, सदा दिन |
3.झूठी शिक्षा है नहीं, कोई दल या झुण्ड भी नहीं,एक कुटुम्ब और एक ही मालिक है, प्रेम से भरा देश वह है, हम जाऍंगे |
4.प्रश्न वहाँ नहीं है, न गड़बड़ कोई भी है,जाति, कुल और भाषा और रंग भी, कोई वहाँ नहीं है, केवल प्रेम |
5.योजना कोई है नहीं, न विधि-विधान वहाँ है,न कोई कैद और न कोई दण्ड है, मनुष्य की प्रभुता वहाँ, नहीं है |
6.बाजार वहाँ है नहीं, न दफ्तर-कारखाना है,धनी न गरीब, छोटे न बड़े, विभेद वहाँ नहीं है, हम एक हैं |
7.यीशु के लोहू से यदि पाप धोए तो वहाँ जाओगे,खोना नहीं तुम ऐसी आशीष को बहुत धन्य जो है, जल्दी आओ |