"हर एक नए आकाश और नयी पृथ्वी की आस देखते हैं |" (2 पतरस Peter 3:13)
स्वर्ग मेरा देश, स्वर्ग मेरा घर,यहाँ परदेशी हूँ, सराय में रहता हूँ,मैं अब यात्रा में हूँ ||
1.कैसा शोभायमान है वह ... स्वर्ग मेरा देश,सुन्दर भी अनुपम है ... स्वर्ग मेरा घर,चलते चलते इस जग में मैं, विश्वास ही से देखता हूँ |
2.सदा दूत मधुर गाते ... स्वर्ग में रहते,बिना विश्राम लिए वे ... स्वर्ग में गाते,देखूँगा वहाँ उन को भी, निश्चय मैं यह जानता हूँ |
3.कब मैं जाऊँ, कब जाऊँ ... त्राता के निकट,उस को मैं कब देखूँ ... मेरा प्रीतम वह,सदा उसके साथ मैं रहूँ, यही दिल से चाहता हूँ |
4.अब मैं जल्दी जाऊँ उस पार ... जहाँ मेरा घर,यात्रा का अन्त दिखता है ... स्थान वह मनोहर,मुझ से पहले जो पहुँचे हैं, मिलने को मैं जाता हूँ |
5.आनन्द है सदा वहाँ ... यह है स्वर्ग धाम,आदर शान्ति अद्भुत सुख ... जहाँ विराजमान,शोक और क्लेश, दुःख होगा सब दूर, अपने काम से विश्राम पाऊँ |