"मैं तो धर्मी होकर तेरे मुख का दर्शन करूँगा |" (भजन Psalm 17:15)
प्रैय यीशु राजा को मैं देखूँ, काफी है,उसके साथ महिमा पाऊँ, यही काफी है,स्वर्गीय अनन्त के धाम में मैं पहुँचकर,संतों के झुंड में रहूँ, यह काफी है ||
1.यीशु के लोहू से मैं अब धुलकर,वचन के घेरे में मैं सुरक्षित रहकर,निष्कलंक संतों में एक गरीब हूँ मैं,लेकिन सोने के पथ में चलूँगा मैं |
2.वीणा जब दूत मिलकर सब बजाएँगे,गंभीर जय ध्वनि का शब्द अद्भुत होगा,हल्लेलूयाह का गीत तब गाया जाएगा,प्रिय यीशु के साथ हर्षित होऊँगा मैं |
3.देखूंगा वह सिर जहाँ काटों का ताज था,सोने का मुकुट पहनाऊँगा आनन्द के साथ,पीठ जो कोड़ो से घायल उसको देखकर,हरेक घाव को चुम्बन करूँगा मैं |
4.हृदय स्तुति और धन्यवाद से भरा है,स्मरण करता हूँ मेरा स्वर्गीय भवन है,हल्लेलूयाह ! आमीन, हल्लेलूयाह !वर्णन से बाहर मेरी जीभ के वह है |
5.आहा ! कब आखिरी तुरही फूंकी जाएगी,आहा ! मुझ गरीब की लालसा पूरी होगी,पिता मेरे आँसू को तब ही पोछेगा,हृदय मेरा आशा से बाट जोहता है |