"हे जवान ... |" (सभोपदेशक 11:9)
अपने परमेश्वर के स्समने,आने के लिए तैयार जो ||
1.अपनी जवानी के दिनों में ... हृदय की लालसा पुरी कर,परन्तु इन बातोम के लिए ... परमेश्वर तेरा न्याय करेगा |
2.इस से पहिले कि विपत्ति आए ... वे वर्ष आए जब तू कहे,मेरा मन इस में नहीं लगता ... अपने सृजनहार को स्मरण कर |
3.ऐसा न हो कोई तेरी जवानी ... तुच्छ जाने और निन्दा करे,प्रभु के पद-चिह्नों पर चल के ... आदर्श जीवन अपना बना |
4.आज्ञाकारी दिनताई से ... आदर करो एक दूसरे का,दूसरों का कार्य अपना समझकर ... प्रेम अपना दिखलाते जाओ |
5.प्रेम, आनन्द, प्रेम, धीरज, करूणा ... भलाई, विश्वास और नम्रता,आत्मा के इन सारे फलों को ... अपने जीवन में दिखाते जाओ |
6.सेवा प्रभु की सहनशीलता से ... यदि करते जाओगे,अपने भले कामों के प्रतिफल ... निश्चय जानो, तुम पाओगे |
7.देखो प्रभु जल्दी आता है ... चिह्न सब पुरे होते हैं,ह्र्दय में आशा रख के उसकी ... गाते जाओ तुम हल्लेलूयाह |