"अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख |" (सभोपदेशक 12:1)
अपने जवानी ए जवान तू,व्यर्थ न कर, अब व्यर्थ न कर ||
1.ईश्वर का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है,और उस को जानना ही बड़ी समझ है,फल पाएगा तू ज्ञानी बनकर |
2.तुच्छ न जाने कोई तेरी जवानी को,चाल चलन पवित्रता और बड़े प्रेम से,जीवन दिखा सब को आदर्श बनकर |
3.क्रूस तेरी सामर्थ हो और निशान भी हो,प्रभु का वचन तेरे हृदय में बसा हो,बलवन्त हो जा दुष्ट पर जय पाकर |
4.जवानी के दिनों में तू सदा यह याद रख,प्रभु तुझे देखता और सुनता तेरी वह,इसलिए सदा सृजनहार को स्मरण कर |
5.प्रभु तुझे चाहता है, सेवा उसकी तू कर,आत्मा बचा जितने जाते हैं नरक की ओर,प्रभु खुश होगा तेरी सेवा देखकर |