"हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है, मैं गाऊँगा ... |" भजन Psalm 108:1
पूर्ण हृदय से धन्यवाद, चढ़ाता हूँ मैं प्रभु को ||
1.मैं ने न चुना प्रभु को, प्रभुजी ने चुना मुझे,मुझ जैसे पापी को, उद्धार दिया प्रभु नेस्वर्गीय राज्य में, भगीदार किया |
2.मेरे हृदय के पाप को, अपने लोहू से धोया,मृतक मेरे आत्मा को, प्रभुजी ने जिलाया,अनन्त जीवन का दान मेझे दिया |
3.पाप के बन्धन में मैं था, हृदय में शान्ति नहीं थी,पाप मैं ने मान लिया, निर्दोष लोहू से धोया,शान्ति आनन्द से मुझे भर दिया |
4.कैसा महान प्रेम प्रभु का, वर्णन से बाहर वह है,कैसे भूलूँ उसके प्रेम को, दिखाया मुझ पापी पर,इसलिए गाऊँगा मैं, प्रशंसा उसकी |
5.स्वर्गीय देश में पहुँचाने, प्रतिझा उसने की है,दुःख हो या सुख हो तौ भी, दौड़ पूरी करूँगा मैं,स्थिर रहूँगा तब तक, पहुँचूं उस देश में |