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SIYON KE GEET · SONG 722

यह जीवन यीशु के लिए

yah jeevan yeeshu ke lie

Romans 12:1

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"परमेश्वर को भवता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है |" रोमियों Romans 12:1
यह जीवन यीशु के लिए बलिदान तुझे करना है,आत्मा, प्राण और पूरे शरीर से प्रभु की सेवा करना है ||
1.मुक्ति दिया प्रभु ने यह अद्‍भुत है, पवित्र जीवन के लिए,तेरी शरीर परमेश्वर का अब मन्दिर बना है, पवित्र उसे रखना है |
2.शरीर की ज्योति, तेरी आँखें हैं, मलिन चीजें यह न देखे,बुरी बातें देखने से मलिन विचार आते हैं, सारा देह अँधेरा होता है |
3.होठों से तू कैसी बातें करता है, क्या अशुद्ध तो नहीं है ?छोटी जीभ बड़ी आग को लगा सकती है, वश में उसे करना है |
4.हाथों से तू कैसे काम करता है, प्रभु क्या तुझ से खुश है ?तेरे जीवन के हर काम प्रभु की गवाही है, नमूना का पात्र क्या तू है |
5.संगति तू कैसी जग में रखता है ? पाँव तेरे कहाँ जाते हैं ?जो दुष्तों की युक्ति पर कभी चलता नहीं है, वही मनुष्य धन्य होता है |
6.पापों में तू क्यों जीता रहे नाश में अन्त तेरा क्यों हो ?यीशु हाथ पसारे तुझे कहता है प्यारे, आ जा शरण उस की ले |
7.तेरे शरीर का जीवित, बलिदान करके, प्रभु यीशु को सौंप दे,जो पवित्र और प्रभु को भावता हुआ है, यह तेरी आत्मिक सेवा है |

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