प्रभु यीशु तारणहार, दृष्टि तू दे मुझे,सदा निहारूँ तुझे मैंअल्फा तू है, ओमेगा भी तू है
1.प्रिय शिष्य यूहन्ना पतमुस में प्रिय यीशु के स्वरूप को,प्रेम निहारा धन्य हो गया प्रिय प्रभु निहारूँ तुझे मैं |
2.कितनी ही बार मैं गिरता रहा अंधे की नाई टटोलता रहा,मुझे सुधार मेरी दृष्टि को साफ कर ध्यान से निहारूँ तुझे मैं |
3.जान बुझकर मैं बिगड़ ही गया कई बार मैं यीशु को घायल किया,धोखे में आकर दृष्टि हटी मेरी दास तेरा निहारूँ तुझे मैं |
4.जितने यीशु की ओर दृष्टि किये, उनके चेहरे प्रकाशित हुए,आनंद से भरकर स्थिर कदमों से, चलता निहारूँ तुझे मैं |
5.विश्वास का कर्ता है यीशु प्रभु पूरा करनेवाला है यीशु प्रभु,विनम्रता से ताकते तेरी ओर धीरज से दौड़ना सिखा दे |
6.जो बातें आँख ने नहीं देखी जो बातें कान ने नहीं सुनीं,बातें मनुष्य के जो चित्त में न चढ़ी मेरे लिए है तैयार की |
7.संसार की अभिलाषओं पर हे प्रभु दृष्टि न जाए अनुग्रह उंडेल,महिमित और दिव्य तेरे स्वरूप को, पूर्ण मन से मैं निहारूँ |