(भजन 127 और 128)
यदि यहोवा घर न बनाए,बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ ही सब होगा;यहोवा नगर की रक्षा न करें,तो रखवालों का जागना व्यर्थ ही तब होगा ।।
1.तुम जो सवेरे-सवेरे उठते हो,देरी से सोते हो... तुम जो... देरी से सोते हो;और दुःख भरी रोटी खाते हो,यह सब व्यर्थ ही है... तुम्हारे लिये... यह सब व्यर्थ ही है ।
2.क्योंकि वह अपने प्रियों को यूंही, नींद है दान करता... यहोवा...गर्भफल है प्रतिफल यहोवा का, लड़के है भाग उसका... दिए हुए...
3.वीरों के हाथ में तीर होते जैसे, जवानी के लड़के... वैसे...क्या ही है धन्य वह पुरुष जिसने, तरकश भरा उनसे... अपना...
4.धन्य है वह जो भय माने याह का, मार्गों पर है चलता... उसके...निश्चय धन्य तू भी होवेगा, तेरा भला होगा... सदा...
5.फलवन्त होवे दाखलता जैसे, तेरी पत्नी घर में... तेरे...बालक भी तेरे चारों और मेज के, जलपाई पौधे से... होंगे...
6.यहोवा अपने डरवैयों को ये, देता है आशीषें... ऐसी...यहोवा तुझको देगा आशीषें, सिय्योन नगर से... बहुत सी...
7.तेरे जीवन भर यरूशलेम का, कुशल तू देखेगा... हमेशा...नाती-पोतों को अपने देखेगा, इस्राएल पर शान्ति... सदा...,
‘‘मैं ही अल्फा और ओमिगा हूँ ।’’ (प्रकाशित 1:8)
1.आदि और अन्त है तू जग की ज्योति, चरणों में तेरे आते हम;(2)हल्लेलूयाह गाते, स्तुति सुनाते सीस नवाते हम ।(2)
2.अल्फा ओमिगा और जीवन की रोटी, तुझी से जीवन पाते हम;हल्लेलूयाह गाते, हाथ फैलाते, आशीषें पाते हम ।
3.लोहू से धो दे और कर तू पवित्र, पूरी पवित्रता चाहते हम;हल्लेलूयाह गाते, आस हम रखते, सामने तेरे झुकते हम ।
4.पवित्र आत्मा का दान हम को दे दे, अपनी प्रतिज्ञा को पूरी कर अब;हल्लेलूयाह गाएँ, जय ललकारें, आनन्द से भर जाएँ हम ।
5.दूल्हा हमारा है तू प्यारा यीशु, लेने को हमें जल्द आएगा;हल्लेलूयाह गाते, खुशी मनाते, स्वर्ग को ले जाएगा ।
6.प्रेम से अब भर दे मनों को हमारे, बिनती सब तुझ ही से करते हम;हल्लेलूयाह गाते, नींद से जगा दे, यही अब चाहते हम ।