‘‘यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है और उसकी बडाई अगम है ।’’ (भजन 145:3)
हे प्रभु तू महान है,स्तुति के योग्य है, बड़ाई अगम है, वर्णन से बाहर है ।
1.सृष्टि जो तेरी महान और अद्भुत, संकल्प क्या ही उत्तम है;मानव जाति के लिए प्रभु ने, सब कुछ तैयार किया है;तेरे काम और तेरी सामर्थ जो, वर्णन से बाहर है ।...हे प्रभु
2.मनुष्य बनाया अपने स्वरुप में, सब अधिकार तू ने दे दिया;मसीह में उसको निर्दोष बना के, खड़ा तू करना चाहता है;तेरी दया और तेरी भलाइयाँ, वर्णन से बाहर है ।
3.सामर्थ जो दी है सृष्टि रचने में, पापी बचानें में अधिक है;सब कुछ दिया, था जो तेरे पास, बहुमोल मोती मोला है;तेरी धार्मिकता, तेरी महिमा, वर्णन से बाहर है ।
4.तेरी दृष्टि में मनुष्य जो अनमोल, प्यार तू उनसे करता है;इसलिये अपना प्राण दिया है, लोहू बहाके बचाया है;तेरा अद्भुत प्रेम, तेरी कृपा जो, वर्णन से बाहर है ।
5.नयी सृष्टि जो अद्भुत और महिमित, मनुष्य को तू ने सौंपा है;राजा और याजक किया है उनको, प्रभु में मीरास बने है;तेरा वह राज्य, तेरा प्रताप जो, वर्णन से बाहर है ।
6.सारी सृष्टि जो मगन और उल्लास, अद्भुत तेरे कार्यो से;तारीफ वह करते, खुशी मनाते तू ने यह सब कुछ किया है;तेरी प्रभुता, तेरी सच्चाई, वर्णन से बाहर है ।