CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 83

महान ईश्वर, अति उत्तम

mahaan eeshvar, ati uttam

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‘‘क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता है... ।’’ (यशायाह 57:15)
महान ईश्वर, अति उत्तम, पवित्र जो सदा स्थिर है,हमारी सामर्थ, पुनरुत्थान वह, हमारा जीवन और रक्षक वह है ।
1.ऊँचे पर और पवित्र स्थान में, निवास करता, वह पवित्र है;फिर भी वह खेदित नम्र हृदय में वास वह करता है, रहता है ।
2.प्रभु के लिए हर दिन हम, भेड़ की नाई घात होते है;फिर भी वह प्रेम किया उसके प्रेम के कारण जयवन्त है, जय पाई है।
3.भरमाने वाले दोषी है, शोकित है और कंगाल है;फिर भी हम सच्चाई, जीवन, आनन्द, धन, सम्पति सब कुछ पाया है ।
4.गिरी हुई हालत हमारी है, अन्धकार के हम वश में है;फिर भी हम उठेंगे जरुर, यहोवा हमारी ज्योति है, उद्धार है ।
5.मसीह के कारण हर दिन हम, निन्दित होते रहते हैं,फिर भी वह जय के उत्सव में, हम सबको लिए फिरता है, स्तुति हो ।

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