‘‘सेनाओं का यहोवा पवित्र... ।’’ (यशायाह 6:3)
सारे स्वर्गीय दूतगण, आराधना करते, कहते प्रभु यहोवा पवित्र;स्वर्ग और पृथ्वी पर महिमा उसकी, है भरपूर ये ही ये गाते है ।।
1.आँखे तेरी इतनी शुद्ध और पवित्र है,कि तू बुराई को कभी देख न सकता है;जो दूर थे अपने समीप लाया तू हमें,प्रभु तेरी प्रशंसा और स्तुति करते है ।
2.हृदय को तू ने मेरे, शुद्ध भी किया है,देखने पाऊँ तुझ को प्रभु, आशा दी है;दी है अपनी पवित्रता है प्रभु मुझे,स्तुति करूँगा प्रभु तू आदर योग्य है ।
3.पाप से पतित इस देह को शुद्ध बनाकर,पवित्र मंदिर मुझे तू बनाया है;अनन्त मीरास के लिए मुझे बुलाया है,प्रभु स्तुति करूँगा मैं तू जो महान है ।
4.अपने लोहू से प्रभु मुझे तू धोया है,नये और जीवते मार्ग से मुझे चलाया है;दिया हियाव प्रवेश करुँ पवित्र स्थान में,करूँगा जीवन भर, प्रभु स्तुति तेरी मैं ।
5.हे पिता स्वर्गीय तू मेरे, संपूर्ण सिद्ध है;अगुवाई तू प्रभु अपनी सिद्धता से दी है,सब कुछ करने के लिए बल भी दिया है,स्तुति तेरी हो प्रभु, तू शान्तिदाता है ।