CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 94

स्तुति, महिमा, भक्ति, आदर

stuti, mahima, bhakti, aadar

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‘‘जितने तूझे ढुंढ़ते है... हर्षित और आनन्दित हो ।’’(भजन 70:4)
स्तुति, महिमा, भक्ति, आदर, युग-युग तेरे है;कितना विश्वासयोग्य ईश्वर है ।।
1.प्रभुजी हम को तू ने दिया है, कैसा आनन्द का दिन है;हम सब आनन्दित होकर के, खुशियाँ मनाते हैं;कितनी भलाईयाँ तू ने की है, भूल नहीं सकते है ।
2.हे प्रभु तू ही महान ईश्वर है, महान कार्य करता है;तेरा अनुग्रह सदाकाल तक, कृपा अद्भुत है;आनन्द के साथ हम तेरी बड़ाई, स्तुति करते है ।
3.हर दिन नई होती रहती है, करुणा तेरी महान है;तेरे अनुपम नाम की हम सब, कीर्ति गाते है;हे करुणामय प्रभु परमेश्वर, स्तुति करते है ।
4.तू ही हमारा परमप्रभु है, अपनी इच्छा पूरी की है;जीवन देकर आत्मा से अपने, हम को चलाता है ।सीधे लोगों की भूमि पर तेरी, सेवा करते है ।
5.निन्दा, वेदना, दुःख और पीड़ा, हम सब के लिए सहा है;मृत्यु को जीतकर शैतान के बल को, प्रभु हटाया है;फिर से प्रभु तू आनेवाला है, जय प्रभु जय तेरी है ।

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