‘‘हे मेरे प्राण, यहोवा को धन्य कह ।’’ (भजन 103:1)
परम पिता की हम स्तुति गाएँ... वही है जो बचाता हमें;सारे पापों को करता क्षमा... सारे रोगो को करता चंगा ।।
1.धन्यवाद दे उसके आसनों में... आनन्द से आए उसके चरणों में;संगीत गाके खुशी से... मुक्ति की चट्टान को जय ललकारे ।
2.वही हमारा है परम पिता... तरस खाता है सर्वसदा;पूरब से पश्चिम है जितना दूर... उतने ही किए दूर हमारे गुनाह ।
3.माँ की तरह उसने दि तसल्ली... दुनिया के खतरों में छोड़ा नहीं;निर्मल दूध है वचन का दिया... और दिया हम को अनन्त जीवन ।
4.चरवाहे की मानिन्द ढूंढ़ा उसने... पापों की कीच से निकाला हमें;हम को बचानें को जान अपनी दी... ताकि हाथ में हम उसके रहें ।
5.घोंसले को बार-बार तोड़कर उसने... चाहा कि सीखें हम उड़ना उस से;परों पर उठाया उकाब की तरह... ताकि हम को चोट न लगे ।