‘‘देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर... फिरती रहती है ।’’(2 इतिहास 16:9)
आओ भजें उसको, प्रचार करें, प्रणाम करें,सिरजनहार, तारणहार और पालनहार ।।
1.सहाय अब तक हमारी की... जान सलीब पर अपनी दी;अगुवाई हम को उसने दी... आँख की पुतली की नाई;रक्षा हमारी की... हाँ... हाँ...
2.सारे जगत के निवासियों में... सीधे मन से जो चलते है;सामर्थ अपनी दिखाने में... दया दृष्टि प्रभु यीशु की;फिरती रहती है... हाँ... हाँ...
3.सलाह दी है हजारों बार... आँखों से अपनी अगुवाई की;बदल के हम अभागों को... तसल्ली हम को अपनी ही;देकर यीशु गुरु... हाँ... हाँ...
4.आँखें जो हैं अग्नि समान... दुःखों से छुड़ाती है;सहाय संकट में करती है... दृष्टि करता रहता है;बच्चों के लिए... हाँ... हाँ...
5.आँखें जो देखती धर्मी को... माँ की नाई सम्भालता है;वह जो तेज से भरी है... बल समय पर देकर हमें;अनाथ न छोड़ेगा... हाँ... हाँ...
6.सातों आँखों से देखता है... नाथ अनाथों का बनता है;आत्मा से हम को भरता है... रखवाले ठहराता है;गाएँ सब हाल्लेलूयाह... हाँ... हाँ...,