CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 104

अपने प्रभु की बड़ाई करके

apane prabhu kee badaee karake

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‘‘मेरा प्रेमी ... दस हजार में उत्तम है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 5:10)
अपने प्रभु की बड़ाई करके,वर्णन करूँगा मैं भजन गाऊँगा ।।
1.पवित्र जो है धर्मी जो है, मलिन वस्त्र मुझ से उतारा;वस्त्र उद्धार का पहना दिया है, तारीफ करूँगा मैं शुद्ध प्रभु की ।
2.पूरब से ज्ञानी भेंटे चढ़ाये, सोना, लोबान और गन्धरस लाके;प्रगट किये वह प्रभु की विजय को, तारीफ करूँगा मैं अमुल्य प्रभु को ।
3.जानूँगा मैं अब महिमित प्रभु को, गौरव से भरपूर ऐसे प्रभु को;दस हजारों में तू ही है उत्तम, देखता रहूँगा तुझे गाता रहूँगा ।
4.भजूँगा तुझे मैं है प्रभु ईश्वर, आत्मा सच्चाई, स्तुति से भरकर;वापस आता है प्रभुओं का प्रभु, आदर महिमा स्तुति हो तेरी ।

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