CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 129

तू ने कहा, अद्वैत ईश्वर

too ne kaha, advait eeshvar

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(प्रकाशित - 1)तू ने कहा, अद्वैत ईश्वर,‘‘मैं जो हूँ’’, स्तुति मैं करुँ तेरी ।।
1.अल्फा ओमेगा तू ही प्रभु है, वर्तमान भूत भविश्य में तू है;पालनहारा जो तू ही मेरा है, सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ;दिल से तुझको मैं स्तुति चढ़ाऊँ ।
2.प्रभु तू ने मुझे शुद्ध किया है, चोखे सोने की नाई किया है;मण्डली में तू मुझे लाया है, तू फिरता सात सोने की दिवट में;सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।
3.तेरे बाल जो ऊन की नाई सफेद है, तू तो मेरा सलाहकार और ज्ञान है;तू तो अनुपम सर्वेसर्वा है, सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ;दिल से तुझको मैं स्तुति चढ़ाऊँ ।
4.तेरा मुखडा सूरज की नाई है, आँखे जलती अग्नि समान जो है;मेरे हृदय को तूने देखा है, भस्म कर दिया मेरे पापों को;सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।
5.पाँव तेरे पीतल की नाई है, पाप-जगत का भी न्याय किया है;क्रूस पर शैतान को हरा दिया, तू ने मुझ को जयवन्त किया है;सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।
6.मुख से दोधारी तलवार निकलती, जो है मेरे शत्रु को नाश करती;पूराने स्वभाव को वह काटती है, प्रभु तू ने यह सब कुछ किया है;सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।
7.तू तो थामे है सात सितारों को, प्रभु आदि और अन्त तू ही है;तू ने मुझ को भरपूर भी किया है, तू तो मेरी सम्पूर्णता भी है;दिल से गाऊँ आमीन, हल्लेलूयाह ।

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