‘‘स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है ।’’(मत्ती 28:18)
सर्वाधिकारी हे प्रभु, तू ही;स्वर्ग और पृथ्वी में तू ही शिरोमणि है ।।
1.हर बातों में बढ़कर विजय पाते हैं,प्रेम किया जो हम से तू ख्रिस्त प्रभु है;हमने देखी है तेरी विजय स्तुति करते है ।
2.उसकी सामर्थ हमारी, विश्वास जो करते है;कितनी महान शक्ति हम जान गए है;जो जीवित हुआ देखकर उसे हर्ष करेंगे ।
3.जो बल देता है वही बलवन्त प्रभु,उसमें सब कुछ मैं करता जो उसको भाता है;उसके पुनरुत्थान की शक्ति की स्तुति करते है ।
4.ख्रिस्त की मृत्यु की समानता में भागी होकर,कष्ट, दुःख, संकट के अनुभवों में जाकर;हम शरीर, प्राण, आत्मा में स्तुति करते है ।
5.जो बलवन्त ईश्वर हमें स्थिर किया है,उसके पुत्र यीशु के द्वारा महिमा उसको दो;और आदर सम्मान मिले, हल्लेलूयाह आमीन ।