‘‘मैं जो हूँ सो हूँ ।’’ (निर्गमन 3:14)
हे प्रभु तू धन्य है,सिरजनहारा, तारणहारा, पालनहारा तू है ।।
1.जीवन की रोटी हमारी जो तू है, तृप्त है किया प्यारा जो तू है;किया एक महान काम, सामर्थ्य हमारी तू है ।
2.उजियाला जग का तू ही हमारा, तूने प्रभुजी नयन है खोला;किया एक अद्भुत काम, प्रकाश हमारा तू है ।
3.द्वार प्रभु एक ही तू है हमारा, प्रवेश कराया, उद्धार है दिया;किया एक सम्पूर्ण काम, पूरी शान्ति तुझ में है ।
4.अच्छा चरवाहा तू ही हमारा, भेंडों के लिये जीवन है दिया;किया छुटकरे का काम, भेडों को ले चलता है ।
5.पुनरुत्थान जीवन तू ही हमारा, मृत्यु से हमको पार है तू किया;किया एक जयवन्त काम, सब कुछ नया किया है ।
6.मार्ग और सच्चाई तू ही है हमारा, झूठी शिक्षा से हमको बचाया;किया एक आत्मिक काम, ऊँचे स्थान में रखा है ।
7.सच्ची दाखलत्ता तू ही प्रभुजी, डाली हम तेरे बने है तुझ में;किया एक गहरा काम, आत्मा का फल दिया है ।