‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुएक्रूस पर चढ़ गया ।’’ (1 पतरस 2:24)
चढ़ाता हूँ मैं धन्यवाद प्रभु... क्रूस के उस प्रेम के लिये;मारा गया और गाड़ा गया था... जी उठा मेरे लिये ।।(2)
1.काँटो का ताज पहिना तूने सिर पर, हाथ पाँव ठोकें क्रूस पर तेरे;हुआ था बलि मेम्ने की नाई... सहा सब मेरे लिये ।(2) चढ़ाता
2.दुःख सहा तू ने कि शान्ति में पाऊँ... क्रूस पर चढ़ा कि मैं पाऊँ मुकुट;मरण को सहा कि मैं जीवन पाऊँ... कैसा प्रेम मेरे लिये ।
3.देखता हूँ महिमित स्वर्ग मेरा... न पाया गुण से यह मेरे;खुशी के आँसू के साथ भजूं मैं... यह सब दान मेरे लिये ।
4.धृणित पाप से करता हूँ धृणा... क्रूस पर वह हो गया है दूर;लगाओ सिंहासन मेरे हृदय में... गाऊँ मैं तेरे लिये ।