‘‘याह की स्तुति करो क्योंकि वह भला है ।’’ (भजन 135:3)
हल्लेलूयाह ! स्तुति प्रशंसा गाऊँगा ।।
1.क्रूस पर चढ़कर लोहू बहा के,(2) बचाया प्रभु जी ने मुझको ।(2)
2.निष्कलंक यीशु के लोहू के द्वारा, पापों का दाग मेरा धुला ।
3.क्यों न गाऊँ मैं गीत उद्धार का, गाता हूँ गुण प्रभु तेरा ।
4.धन्य प्रभु बलिदान के लिए, करता हूँ दण्ड़वत्त तुझको ।
5.गाऊँगा लेकर सुसमाचार को, करूँगा मुक्ति का प्रचार मैं ।
6.साथ रहो प्रभु हरदम मेरे, बढ़ाओ मेरे कदम को ।
7.हर्षित मन से ऊँची आवाज से, करता हूँ प्रभु की उपासना ।