(भजन 34:1)
हर समय स्तुति करता रहूँगा ।सदा उसकी कीर्ति मैं गाता रहूँगा ।
1.यहोवा से प्रार्थना करते ही... मेरे भय को दूर किया;सारे संकटों में साथ मेरे रहकर,पास बुलाकर मुझे दिलासा दिया... आराधना सदा करूँगा ।
2.जीवन भर मैं गाता रहूँगा... तेरी भलाई के लिए प्रभु;मेरे जीवन के अन्तिम क्षण तक,तेरी विश्वासयोग्यता के लिए... सदा तुझे मैं भजूँगा ।
3.महान है तेरी महिमा जो... अद्भुत प्रभावशाली ईश्वर;पूरे दिल से स्तुति करूँगा,अनन्त तेरे कार्यो के लिए... निश्चय तुझे मैं भजूँगा ।
4.तेरी मनसा को पूरा करके... गौरव के साथ तू ने अगुवाई की;मेरा प्रभु और चरवाहा होकर,तू प्रभु मेरे जीवन में है... सच्चाई से तुझे भजूँगा ।