‘‘उस ने खरे मन से उनकी चरवाही की ।’’ (भजन 78:72)
मैं गाऊँगा, हर समय गाऊँगा,प्रभुजी स्तुति तेरी करूँगा ।।
1.उत्तम रखवाला तू जो बना है, भेडों के लिए प्रभु प्राण दिया है;पाप का प्याला तूने पिया है, उद्धार का कटोरा मुझे दिया है;हर्षित हो के प्रभु गाऊँगा ।
2.महान रखवाला तू अब साथ है, आवश्यकताएँ सब पूर्ण करता है;तू मेरे जी में जी ले आता है, तराई के अनुभव में निकट रहता है;यात्रा में गाते गाते जाऊँगा ।
3.प्राणों का रखवाला तू जो सच्चा है, रखवाली भेड़ों की न्याय से करता है;नकली रखवालो से तुझ को धृणा है, तेरी भेडें तेरी आवाज सुनती है;पूरे हृदय से प्रभु गाऊँगा ।
4.प्रधान रखवाला तू ही मेरा है, शीध्र ही प्रगट तू होने वाला है;महिमा का मुकुट देनेवाला है, पवित्र नगर में रखनेवाला है;ऊँचे स्वर से प्रभु गाऊँगा ।