‘‘तेरा नाम बहाया हुआ तेल सा है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 1:3)
प्रभु तेरा नाम सुवन्दित गाऊँ, (2)यीशु तेरा नाम सुवन्दित गाऊँ ।।
1.मैं तो था मुर्दा पाप में अपने (2)... प्रेम किया अति भारी ।(2)
2.खोया हुआ था भुला था बिसरा... ढूंढ़ने आया तू जग में ।
3.जब मेरे टूटे सारे सहारे... तू ने आन बचाया ।
4.सूली पर तू ने लोहू बहाया... पाप का भय है मिटाया ।
5.मरके तू फिर से हुआ है जिन्दा... मौत का डँक मिटाया ।
6.अब है तू बैठा बाप के दहिने... तू ही है मेरा सहारा ।
7.मुझ को तू लेने आएगा फिर से... गाऊँ मैं गुण क्यों न तेरे ।