‘‘और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारेपरमेश्वर की स्तुति का है ।’’ (भजन 40:3)
स्तुति हो यीशु तेरी, हल्लेलूयाह ! स्तुति हो यीशु तेरी;(2)स्तुति हो तेरी कि तूने बचाया, और किया है हमको बरी ।।(2)
1.जमा हुए हैं हम अब, हल्लेलूयाह !... गाते हैं मिलकर हम सब;तू ही हमारा है त्राता और दाता... और तू ही हमारा है सब ।
2.कीच से निकला हमें, हल्लेलूयाह ! किया है तू ने आजाद;स्तुति अब गाए हम सब क्यों न तेरी, और हो जाए हम तेरे दास ।
3.सारे फरिश्ते एक साथ, हल्लेलूयाह ! गाते है मिलकर हरदम;स्तुति वे करते हैं तेरी हमेशा, और करते नहीं हैं विश्राम ।
4.जाएँगे जब हम आसमान, हल्लेलूयाह ! गाएँगे मिलकर हरदम;बरबत बजा के, आवाजें मिलाकर के, हम गाएँगे सुबह ओ शाम ।