‘‘अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर कोभावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओं । (रोमियों 12:1)
हृदय भेंट चढ़ाए प्रभु को... स्तुति प्रशंसा करें;हम सब सन्त मिलकर ।।
1.पाप का भार उठाने, आया मसीह जग में;(2)पापियों के सब पाप मिटाने(2)... जीवन सनातन दिया ।
2.संकट क्लेश उठाया, नम्र और दीन बनकर;द्वार उद्धार का खोला प्रभुजी(2)... सनातन आशा दी ।
3.आश्चर्य स्वर्गीय प्रेम, हम पापियों के लिए;फिर मत जाना पापी जगत में(2)... पाप में न फँसकर ।
4.अर्पण करते है तुझ को, आत्मा प्राण, देह भी;रक्षा करो प्रभु इस जीवन की(2)... बिनती हमारी यही ।