‘‘यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर... फिरती रहती है ।’’(2 इतिहास 16:9)
भर दो प्रभु इस मुँह को, स्तुति के गीतों से;मन्दिर हम है तेरे लिये, महिमा हो इस जीवन से ।।
1.आँखें तेरी है सारे जग में, क्या कोई छीप सकता तुझ से ?अग्नि समान अंतर-भेदी, और ज्ञानी है सब से ।
2.सारे विश्व में तू हाजिर है, कोने कोने को छान लेता है;हर मनुष्य की गति को तू जानता, क्योंकि ऊपर है सब से ।
3.सारे विश्व का सिर्जनहारा है, आज्ञा देकर बनाया तू उसे;पाप के कारण बिगड़ा है यह, अब नाश होगा पूरे जड़ से ।
4.सारे विश्व का न्यायाधीश तू है, अन्याय तुझ से नहीं होता है;खराई से न्याय करता है, कोई बचे नहीं तेरे प्रताप से ।
5.तेरा प्रेम अद्भुत सनातन का है, नहीं चाहता कोई नाश हो जाए;आया इसलिए तू जग में, प्राण देकर बचाए दण्ड से ।
6.जय जयकार हो तेरी, हे प्रभु, तुने हम को बचाया नरक से;सामर्थ, गौरव, प्रताप तेरा है, हल्लेलूयाह गाते आदर से ।