‘‘उसकी सामर्थ हमारी और... कितनी महान है ।’’(इफिसियों 1:19)
सामर्थी ईश्वर तू, तेरी सामर्थ अपार जो है ।।
1.मसीह परमेश्वर की सामर्थ जो है, शैतान की शक्ति को तोड़ा वही है;प्रधानता, अधिकार, सामर्थ, प्रभुता, सब कुछ उसके पाँव तले है ।
2.लोहू की शक्ति जो बहुत ही अद्भुत है, पापी को पाप से छुड़ाता वह है;जयवन्त करता, प्रतिदिन धोता, ढांपे रहता और सम्भालता है ।
3.क्रूस की शक्ति देखो बहुत ही बलवन्त है, पुराने मनुष्य को मारता वह है;संसार और अभिलाषा खुद के जीवन को, सच्चाई से हमें थामता है ।
4.पुनरुत्थान की शक्ति बहुत ही गंभीर है, संसार के स्तर से हमें उठाता है;ऊँचाई में रखता, स्वर्गीय बनाता, संसार जो कुड़ा है दिखाता है ।
5.आत्मा की शक्ति का कार्य बड़ा है, गवाह बनाकर सेवा लेता है;अगुवाई करता, आत्मिक बनाता, सब कुछ हम को समझाता है ।
6.वचन की शक्ति को जानना जरुरी है, दोधारी तलवार वह काटता जरुर है;बातें वह करता, हृदय को छूता, प्रभु की इच्छा हमें बताता है ।
7.प्रार्थना की शक्ति तो प्रभावशाली है, हररोज नई सामर्थ से भरती है;चेहरा चमकाती, जागृत रखती, असम्भव को सम्भव करती है ।