‘‘वह इसलिए प्रगट हुआ की हमारे पापों को हर ले जाएँ ।’’(1 यूहन्ना 3:5)
जय प्रभु यीशु सृजनहार,पापी का तू ही है तारणहार ।।(2)
1.नर तन धार लियो अवतार... जग की ज्योति जीवन अपार(2)सत, चित, आनन्द के हो द्वार... हे अनन्त जीवन देवनहार ।(2)
2.स्वर्ग को त्याग लियो अवतार... ख्रिस्त पधारे पापिन कार;दुःख, संकट सब सहे अपार... पापी जगत के तारणहार ।
3.बहाई क्रूस पर लोहू की धार... प्रभु ने करने पापिन उद्धार;पाप धुलाकर हो जाओ पार... प्रभु ने खोला स्वर्गीय द्वार ।
4.करो प्रभु की जय जयकार... दया है उसकी सब पर अपार;तीनों लोक के केवल उद्धार... हम पापिन के एक ही सहारा ।