‘‘सो तूम्हारे लिए जो विश्वास करते हो वह बहुमूल्य है ।’’(1 पतरस 2:7)
1.मसीह में मैं ने पाया है... एक मोती बहुमोल;वह लाखों में पियारा है... उस जैसा किस का मोल ।
2.यहूदा का वह सिंह भी है... ईश्वर का मेम्ना पाक;दुनिया में मेरा रक्षक है... जब राह हो भयानक ।
3.केसर वही शारोन का है... और घाटी का सोसन;यीशु ही ज्योति दुनिया का है... उस से दिल प्रकाशमान ।
4.सलीब उठाकर कलवरी... गया मेरे लिए;लोहू बहाया जान दे दी... कि खरीदे मुझे ।
5.लेकिन अब फिर वह जीवित है... और जीवित रहेगा ।घोर के बन्धन को तोड़ा है... ‘‘मौत तेरा डंक कहाँ ?’’
6.ऐ यीशु अपना प्यार अद्भुत... मुझे और भी समझा;ज्यों तेरा आना है निकट... मुझे प्रस्तुत करा ।
7.हल्लेलूयाह मैं गाऊँगा... जब जाऊँगा आसमान;तब तुझ ही को मैं देखुुंगा... खुश रहूँगा हर क्षण,