CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 192

यीशु नाथ के प्रेम अपार का

yeeshu naath ke prem apaar ka

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‘‘हे प्रभु, मेरी चट्टान और उद्धार करने वाले ।’’ (भजन 19:14)
1.यीशु नाथ के प्रेम अपार का... करूँगा मैं स्तुति गान;उसने क्रूस पर प्राण दे अपना... मुझे मुक्ति की प्रदान ।गाओ, गाओ, प्रेम मसीह का... जिसके रक्त से हुआ त्राण;मेरा सारा ऋण भर दिया... उसने क्रूस पर दे के प्राण ।
2.उसके इस अनोखे प्रेम का... नित करूँगा मैं बयान;पापियों के त्राण के लिए... प्राण दे दिया बलिदान ।
3.उसकी स्तुति क्यों न गाऊँ... जिसकी सामर्थ है अक्षय ?मृत्यु, नरक, पाप के ऊपर... मुझ को देता कैसी जय !
4.प्रेम का प्रेरित हो मैं गाऊँ... यीशु का अनूठा प्यार;उसने मुझे जीवन दिया... वह है मेरा प्राणधार ।

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