CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 193

जो लाखों जीभें मेरी हों

jo laakhon jeebhen meree hon

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‘‘वे ऊँचे शब्द से कहते थे कि वध हुआ मेम्ना...धन्यवाद के योग्य है ।’’ (प्रकाशित 5:12)
1.जो लाखों जीभें मेरी हों... जो बस नहीं होगी;कि उचित रीति से करुँ... स्तुति त्राणकर्ता की ।
2.यीशु का नाम दूर करता डर... और शोक मिटाता है;हर पापी उसके सुनने पर... पूरा सुख पाता है ।
3.वह तोड़ के पाप की शक्तियाँ... छुड़ाता कैदी को;रक्त उसका मन शुद्ध करता है... शुद्ध किया है मुझ को ।
4.जब यीशु बोलता मृतक लोग... उठ जीवन पाते हैं;निराश मन साहस पाते है... और आशा रखते हैं ।
5.हे बहरों सुनों उसकी बात... हे गूँगो स्तुति करो;हे अन्धों देखो प्रभु को... हे लंगड़ों उछलो ।

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