CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 197

शोभित हो मुकुट से

shobhit ho mukut se

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‘‘महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है ।’’ (भजन 8:5)
1.शोभित हो मुकुट से... मेम्ना सिंहासन पर;स्वर्गीय संगीत की आभा में... खो जाते जग के स्वर ।उठ, मेरे प्राण अब गा... तेरे त्राता की जय;और उसको अपना राजा मान... अभी और हर समय ।
2.शोभित हो मुकुट से... जीवन का प्रभु जो;मृत्यु पर जयवन्त हुआ है... कि त्राण का काम सिद्ध हो ।हम गाते, प्रशंसा... महिमा और सन्मान;उसका, वह जो देने जीवन... खुद हुआ बलिदान ।
3.शोभित हो मुकुट से... जो प्रभु है प्रेम का;उसकी महिमा है अपार...छिदा है तन उसका ।स्वर्ग का कोई भी दूत... न तेज को सह सके;वे सिर झुका सराहते हैं... महाप्रतापी को ।
4.शोभित हो मुकुट से... राजा शान्ति का जो;कि युद्ध समाप्त हो जगत में... नित स्तुति प्रार्थना हो ।छिदे पैरों के पास... स्वर्ग के सिंहासन पर;सुहाने फूलों की सुगंध... फैलेगी निरंतर ।
5.शोभिज हो मुकुट से... वह प्रभु युगों का;वचन-मात्र से किया है... निर्माण सौर मंड़ल का ।तू पापियों का मीत !... है त्राता जय तेरी !महिमा, स्तुति अविरत... होती रहे तेरी ।

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