‘‘हे ईश्वर तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य है ।’’ (भजन 139:17)
हे ईश्वर तेरे यह विचार, मेरे लिए क्या ही अनमोल है;तेरी करुणा मेरे लिए, सदा सर्वदा बनी रहती है ।।
1.आज चढ़ाऊँ धन्यवाद प्रभु को... मेरे हृदय से तेरे स्तुति गान;(2)बड़ाई तारीफ तेरे गुण गाता हूँ(2)... कारण तू है मेरा तारणहार ।
2.याद पहले न की मैं प्रभु को... पर पहले से मुझे वह जाना;ढूंढ़ा मैंने न जग में प्रभु को... मुझ दुष्ट को तू ढूंढ़ निकाला ।
3.सत्यनाश के गड़हे में जाता मैं... दया तेरी हुए बचाने मुझे;संकट मृत्यु से मुझ को बचाने... मेरा प्रभु हुआ बलिदान ।
4.बुरे संसार में पाप मैं डूबा था... श्राप दण्ड भी मुझे सहना था;प्रभु यीशु ने सहा दुःख क्रूस पर... मुझे नया जीवन देने को ।
5.कैसा दुःखमय था क्रूस का वह दृश्य... कोड़े मारे थूका था प्रभु पर;असीम वेदना सहा दुःख और संकट... निर्दोष मेम्ना मुझे बचाने को ।
6.हे प्रभु मैं कैसे चुप रहूँगा... तेरी स्तुति बिना और धन्यवाद;गाता रहूँगा पूरे जीवनभर... अथाह प्रेम तेरा है जो अपार ।